कुंभ
Jan 20 - Feb 18
भविष्यफल
अमोघ तंत्र के विश्लेषण अनुसार कुंभ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष 'कर्म शोधन' का है। शनि का गोचर स्वयं की राशि में होने से आप पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण प्रभावी है जो कठिन परिश्रम के बाद ही फल देगा। बृहस्पति का चतुर्थ भाव में होना सुख-साधनों में वृद्धि कराएगा लेकिन अष्टकवर्ग की गणना के अनुसार लग्न में बिंदुओं की कमी आत्मबल को कमजोर कर सकती है।
सप्तम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि वैवाहिक जीवन में नीरसता या तनाव ला सकती है। राहु के द्वितीय भाव में होने से वाणी दोष के कारण संबंधों में दरार आ सकती है। प्रेम पक्ष में स्थिरता के लिए आपसी विश्वास को प्राथमिकता दें और अहंकार का त्याग करें।
दशम भाव पर देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि करियर में स्थिरता प्रदान करेगी। हालांकि शनि की साढ़ेसाती के शिखर प्रभाव के कारण कार्यों में विलंब संभव है। अष्टकवर्ग में एकादश भाव के मजबूत बिंदु आय के निरंतर स्रोत सुनिश्चित करेंगे लेकिन दशम भाव में मंगल की दृष्टि कार्यस्थल पर गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने का संकेत देती है।
शनि के लग्न गोचर के कारण हड्डियों और जोड़ों में पीड़ा हो सकती है। मानसिक अवसाद और अनिद्रा से बचने के लिए अघोर साधना या ध्यान का सहारा लें। चतुर्थ भाव में राहु-केतु की धुरी हृदय और फेफड़ों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी देती है।
अमोघ तंत्रानुसार 'शनि यंत्र' को ताम्र पत्र पर उत्कीर्ण कर धारण करें। प्रत्येक शनिवार काले तिल के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष के नीचे जलाएं और 'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र की एक माला जपें। लोहे का एक अभिमंत्रित छल्ला मध्यमा उंगली में धारण करना अमोघ सुरक्षा प्रदान करेगा।