वृश्चिक
Oct 23 - Nov 21
भविष्यफल
वृश्चिक राशि के लिए यह वर्ष शनि की ढैय्या के प्रभाव में रहेगा, जो मानसिक और पारिवारिक चुनौतियों का संकेत देता है। हालांकि, एकादश भाव में केतु की स्थिति आर्थिक स्थिरता और विजय प्रदान करेगी। अघोरी सिद्ध गणना के अनुसार, गुरु का गोचर आपके आत्मबल को बढ़ाएगा और अटके हुए कार्यों को पूर्ण करेगा।
पंचम भाव में राहु प्रेम संबंधों में भ्रम और गलतफहमी पैदा कर सकता है। गुरु की अमृत दृष्टि वर्ष के मध्य से संबंधों में प्रगाढ़ता लाएगी। अविवाहितों के लिए विवाह के योग प्रबल बन रहे हैं।
दशम भाव में अष्टकवर्ग के उच्च बिंदुओं के कारण कार्यक्षेत्र में पदोन्नति के योग हैं। शनि की ढैय्या के चलते कड़ी मेहनत अनिवार्य है, लेकिन ग्यारहवें भाव में केतु का गोचर व्यापार में आकस्मिक लाभ और नए अनुबंध दिलाएगा। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना आवश्यक है।
राहु के पंचम भाव में होने से उदर विकार और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। मंगल की दृष्टि के कारण रक्त संबंधी अशुद्धियों के प्रति सचेत रहें। अमोघ तंत्रानुसार प्राण शक्ति को संतुलित करने के लिए प्राणायाम अनिवार्य है।
मंगलवार को 'हनुमान बाहुक' का पाठ करें। 'शत्रु नाशक बगलामुखी यंत्र' को तांबे के पत्र पर उत्कीर्ण करवाकर पूजन कक्ष में स्थापित करें और 'ॐ ह्रीं बगलामुख्यै नमः' का जाप करें।