कन्या
Aug 23 - Sep 22
भविष्यफल
अमोघ तंत्र और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कन्या राशि के लिए यह वर्ष संघर्ष के साथ सफलता का है। छठे भाव का स्वगृही शनि 'हर्ष योग' के समान फल देगा, जिससे ऋण और रोग से मुक्ति मिलेगी। नवम भाव में स्थित गुरु का गोचरीय प्रभाव भाग्य में वृद्धि करेगा, हालांकि लग्न में केतु होने से निर्णय लेने में भ्रम हो सकता है। हस्त नक्षत्र के जातकों के लिए अक्टूबर से दिसंबर का समय अत्यंत शुभ रहेगा।
राहु के सप्तम भाव में गोचर के कारण प्रेम संबंधों में भ्रम और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। गुरु की नवम भाव से लग्न पर अमृत दृष्टि संबंधों को टूटने से बचाएगी। विवाहित जातकों के लिए जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है। नए रिश्तों में जल्दबाजी न करें, समय की प्रतीक्षा करें।
करियर के दृष्टिकोण से शनि का छठे भाव में गोचर शत्रुओं पर विजय और कार्यक्षेत्र में स्थायित्व लाएगा। दशम और एकादश भाव में अष्टकवर्ग के मध्यम बिंदु (28-30) दर्शाते हैं कि पदोन्नति के लिए अधिक परिश्रम की आवश्यकता है। सरकारी क्षेत्र से जुड़े जातकों को अगस्त के बाद गुरु के प्रभाव से विशेष लाभ होगा। व्यापार में नए अनुबंधों के लिए समय अनुकूल है।
स्वास्थ्य के मामले में लग्न में केतु और सप्तम में राहु का प्रभाव मानसिक तनाव और उदर रोगों (Gas/Acidity) का कारण बन सकता है। शनि की दृष्टि अष्टम भाव पर होने से पुराने रोगों में सावधानी बरतें। तंत्रिका तंत्र और त्वचा संबंधी विकारों के प्रति सचेत रहें। सात्विक आहार और ध्यान से केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होंगे।
अमोघ तांत्रिक उपाय: 'बुध यंत्र' को भोजपत्र पर अष्टगंध से अंकित कर चांदी के ताबीज में गले में धारण करें। प्रति बुधवार 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' मंत्र की तीन माला जपें। पक्षियों को सात प्रकार का अनाज खिलाएं और भैरव मंदिर में चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।